हिन्दू विवाह मे सबसे आवश्यक रस्म क्या है ?

हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत किसी भी हिन्दू जोड़ों की शादी सिद्ध होने के लिए सांसे महत्वपूर्ण रस्म सप्तपदी माना गया है। सप्तपदी का अर्थ है की अग्नि के चारों ओर वर-वधू का सात फेरा लेना। उपर्युक्त अधिनियम के धारा 7 के अनुसार यदि किसी विवाह मे सप्तपदी की रस्म पूरी कर ली जाती है, तो वह वैध माना जाएगा ।

न्यायिक दृष्टिकोण (Case Laws)

(i) प्रियंवदा वर्मा बनाम सूर्य कुमार वर्मा (1971) AIR 1153

इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी हिंदू विवाह में आवश्यक धार्मिक रस्मों का पालन नहीं किया गया है, तो वह विवाह अवैध (invalid) होगा। सप्तपदी का पालन न करने पर विवाह को अमान्य माना गया।

(ii) सुरिंदर कौर बनाम हरबंस सिंह (1984) AIR 1591

इस फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि सप्तपदी पूरी नहीं हुई है, तो विवाह कानूनी रूप से अपूर्ण (incomplete) रहेगा और उसे मान्यता नहीं दी जाएगी।

(iii) यमुना बाई बनाम अनंत राव (1988) AIR 644

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा कि सिर्फ सहमति से विवाह वैध नहीं होगा, बल्कि हिंदू विवाह के आवश्यक संस्कार, विशेष रूप से सप्तपदी, संपन्न होने चाहिए।

निष्कर्ष

    हिंदू विवाह में सबसे आवश्यक रस्म सप्तपदी (सात फेरे) है। यदि यह रस्म पूरी नहीं होती, तो विवाह अवैध हो सकता है। न्यायालयों ने भी अपने फैसलों में सप्तपदी को हिंदू विवाह की सबसे महत्वपूर्ण रस्म के रूप में स्वीकार किया है।