मानसिक क्रूरता के कितने प्रारूप हो सकते है ?

मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) के कई रूप हो सकते हैं, और यह मामला परिस्थितियों के आधार पर तय किया जाता है। भारतीय न्यायपालिका ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1)(ia) के तहत मानसिक क्रूरता को तलाक का आधार माना है। नीचे इसके कुछ प्रमुख प्रारूप दिए गए हैं:

  1. अपमानजनक व्यवहार (Humiliating or Insulting Behavior)
    • बार-बार अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना।
    • सार्वजनिक रूप से या परिवार में बेइज्जती करना।
    • बार-बार पति को नाकारा या असफल साबित करने की कोशिश करना।
  2. झूठे आरोप (False Allegations)
    • पति के खिलाफ झूठे दहेज उत्पीड़न (498A IPC) या घरेलू हिंसा के मामले दर्ज कराना।
    • पति पर झूठे व्यभिचार (Adultery) या अवैध संबंधों का आरोप लगाना।
    • चरित्र हनन करना या पति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना।
  3. असंवेदनशील व्यवहार (Indifferent or Insensitive Attitude)
    • बिना कारण भावनात्मक दूरी बनाए रखना।
    • पति की जरूरतों और भावनाओं की अनदेखी करना।
    • बीमार होने पर भी पति की देखभाल न करना।
  4. यौन संबंधों से इनकार (Denial of Marital Relationship)
    • बिना किसी उचित कारण के लंबे समय तक पति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना।
    • लगातार अवहेलना और असंतोषजनक व्यवहार से मानसिक तनाव देना।
    • कोर्ट के अनुसार, अगर पत्नी बिना किसी कारण लंबे समय तक शारीरिक संबंध से इनकार करती है, तो यह मानसिक क्रूरता मानी जा सकती है।
  5. झगड़ालू या हिंसक व्यवहार (Quarrelsome or Violent Nature)
    • बिना कारण के बार-बार झगड़ा करना।
    • घर में तनावपूर्ण माहौल बनाए रखना।
    • पति को बार-बार आत्महत्या की धमकी देना।
  6. आत्महत्या की धमकी (Threats of Suicide or Self-Harm)
    • पत्नी द्वारा बार-बार आत्महत्या की धमकी देना या झूठे नाटक करना।
    • इससे पति मानसिक तनाव में रहता है और समाज में उसकी प्रतिष्ठा भी प्रभावित होती है।
  7. आर्थिक शोषण (Financial Exploitation)
    • पति की आर्थिक स्थिति को नजरअंदाज करना और जरूरत से ज्यादा पैसों की मांग करना।
    • पति को माता-पिता की जिम्मेदारी निभाने से रोकना।
    • जानबूझकर आर्थिक बोझ बढ़ाना।
  8. ससुराल वालों के प्रति दुर्व्यवहार (Misbehavior with In-laws)
    • पति के माता-पिता और परिवार के सदस्यों का अपमान करना।
    • पति को उसके माता-पिता की सेवा करने से रोकना।
    • झूठे आरोप लगाकर परिवार में मतभेद पैदा करना।
  9. बिना कारण छोड़कर जाना (Desertion Without Reason)
    • पत्नी का बिना किसी ठोस कारण के लंबे समय तक पति को छोड़कर चले जाना (कम से कम 2 साल)।
    • वापस आने के लिए तैयार न होना।
  10. विवाह संबंधों की उपेक्षा (Neglecting Marital Duties)
    • बिना किसी उचित कारण के पति से बातचीत या सामान्य जीवनशैली में रुचि न लेना।
    • किसी और के साथ अधिक घनिष्ठता दिखाना और पति को अनदेखा करना।
    • लगातार घर से बाहर रहना और पति की जरूरतों को महत्व न देना।

न्यायिक दृष्टिकोण

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई फैसलों में यह स्पष्ट किया गया है कि मानसिक क्रूरता का निर्धारण प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है। यदि पत्नी का व्यवहार ऐसा हो जिससे पति को गंभीर मानसिक तनाव और पीड़ा हो, तो इसे मानसिक क्रूरता माना जा सकता है।

महत्वपूर्ण फैसले:

  1. नरेन्द्र बनाम कुमारी मेघना (2016) – पत्नी का लगातार पति को छोड़कर चले जाना मानसिक क्रूरता माना गया।
  2. शोभा रानी बनाम मधुकर रेड्डी (1988) – बिना कारण शारीरिक संबंध से इनकार करना मानसिक क्रूरता मानी गई।
  3. समाधुराई बनाम मणिमेघलाई (2022) – झूठे आरोप लगाने को मानसिक क्रूरता करार दिया गया।