ट्रायल के दौरान कोर्ट अग्रसर विवेचना (Further Investigation) का आवेदन किस चरण तक स्वीकार कर सकता है ?
अग्रसर विवेचना (Further Investigation) से संबंधित आवेदन भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 173(8) के तहत किया जाता है। इस संबंध में कोर्ट द्वारा इसे स्वीकार करने की सीमा और चरण निम्नलिखित रूप से समझी जा सकती है—
1. चार्जशीट दाखिल होने के बाद लेकिन ट्रायल शुरू होने से पहले
• यदि चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और ट्रायल शुरू नहीं हुआ है, तो पुलिस को स्वतंत्र रूप से या अभियोजन की ओर से कोर्ट की अनुमति लेकर अग्रसर विवेचना करने का अधिकार है।
2. ट्रायल के दौरान (जब सबूतों की रिकॉर्डिंग चल रही हो)
• सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने कई मामलों में माना है कि ट्रायल के दौरान भी यदि नए सबूत सामने आते हैं या मामले की निष्पक्षता के लिए आवश्यक हो, तो कोर्ट अग्रसर विवेचना की अनुमति दे सकता है।
• Vinay Tyagi v. Irshad Ali (2013) केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “न्यायिक प्रक्रिया का उद्देश्य सत्य का अन्वेषण है, और यदि नए तथ्यों के आधार पर विस्तृत जांच आवश्यक हो, तो उसे रोका नहीं जाना चाहिए।”
3. न्यायिक निर्णय (Judgment) सुनाने से पहले
• जब ट्रायल समाप्त हो चुका हो और कोर्ट फैसला सुनाने की प्रक्रिया में हो, तब सामान्यतः अग्रसर विवेचना की अनुमति नहीं दी जाती, जब तक कि कोई असाधारण परिस्थिति न हो।
• Amrutbhai Shambhubhai Patel v. Sumanbhai Kantibhai Patel (2017) केस में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने के बाद पुलिस को स्वतः ही आगे की विवेचना करने का अधिकार नहीं होता, बल्कि इसके लिए कोर्ट की अनुमति आवश्यक होती है।
*Vinubhai Haribhai Malaviya Vs. The State of Gujarat (2019) केस में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है की अग्रसर विवेचना का आवेदन आरोप तय होने से पहले कभी भी दिया जा सकता है । (para 39)
महत्वपूर्ण बिंदु:
1. अभियोजन (Prosecution) या आरोपी (Defense) दोनों ही कोर्ट से आवेदन कर सकते हैं, यदि उन्हें लगता है कि किसी नए तथ्य की जांच आवश्यक है।
2. यदि अग्रसर विवेचना का आवेदन किसी दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से किया गया हो (जैसे ट्रायल में देरी करने के लिए), तो कोर्ट इसे अस्वीकार कर सकता है।
3. सत्र न्यायालय और उच्च न्यायालय दोनों के पास इस संबंध में निर्देश देने की शक्ति होती है।
निष्कर्ष:
कोर्ट चार्जशीट दाखिल होने के बाद और ट्रायल के दौरान, अग्रसर विवेचना का आवेदन आरोप तय होने से पहले कभी भी स्वीकार कर सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह से कोर्ट के विवेक पर निर्भर करता है कि मामला किस परिस्थिति में है और क्या यह न्यायहित में आवश्यक है।