ट्रायल के किन चरणों में डिस्चार्ज आवेदन दायर किया जा सकता है?
डिस्चार्ज आवेदन (Discharge Application) एक आरोपी द्वारा यह मांग करने के लिए दायर किया जाता है कि उसके खिलाफ कोई ठोस आधार नहीं है और मुकदमे (Trial) को आगे न बढ़ाया जाए। दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) के तहत इसे अलग-अलग मामलों में विभिन्न चरणों पर दायर किया जा सकता है:
1. पुलिस रिपोर्ट पर आधारित मामलों में (धारा 239, CrPC)
• चरण: जब पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी हो लेकिन अभी आरोप तय (Charge Framing) न हुए हों।
• लागू होता है: ऐसे वारंट मामलों (Warrant Cases) में, जो मजिस्ट्रेट द्वारा सुनवाई योग्य होते हैं और पुलिस रिपोर्ट पर आधारित होते हैं।
• आधार: यदि मजिस्ट्रेट को यह लगता है कि अभियुक्त के खिलाफ मुकदमे को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है, तो उसे डिस्चार्ज (मुक्त) किया जा सकता है।
2. निजी शिकायत पर आधारित मामलों में (धारा 245, CrPC)
• चरण: जब मजिस्ट्रेट शिकायतकर्ता (Complainant) और गवाहों (Witnesses) के बयान दर्ज कर ले लेकिन आरोप तय न किए गए हों।
• लागू होता है: उन मामलों में, जहां मामला निजी शिकायत के आधार पर शुरू किया गया हो (यानि पुलिस चार्जशीट नहीं लाई हो)।
• आधार: यदि मजिस्ट्रेट को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लगता है कि आरोपी के खिलाफ कोई मजबूत मामला नहीं बनता, तो उसे डिस्चार्ज किया जा सकता है।
3. सेशन ट्रायल वाले मामलों में (धारा 227, CrPC)
• चरण: जब चार्जशीट दाखिल हो चुकी हो और मामला सेशन कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया हो लेकिन अभी आरोप तय नहीं किए गए हों।
• लागू होता है: उन मामलों में जो केवल सेशन कोर्ट द्वारा सुने जा सकते हैं, जैसे कि गंभीर अपराध (दुष्कर्म, हत्या, डकैती आदि)।
• आधार: यदि जज यह पाता है कि अभियोजन (Prosecution) के पास आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है, तो आरोपी को डिस्चार्ज किया जा सकता है।
महत्वपूर्ण बिंदु
• डिस्चार्ज आवेदन केवल चार्ज तय होने से पहले ही दायर किया जा सकता है। एक बार आरोप तय हो जाने के बाद, मुकदमे को रोका नहीं जा सकता, और आरोपी को बरी (Acquittal) होने के लिए ट्रायल पूरा करना पड़ता है।
• अदालत केवल अभियोजन (Prosecution) के साक्ष्यों को देखकर निर्णय लेती है, न कि आरोपी के बचाव (Defense) के आधार पर।
• यदि प्रथम दृष्टया (Prima Facie) मामला बनता है, तो अदालत आरोपी को डिस्चार्ज करने के बजाय ट्रायल जारी रखेगी।
निष्कर्ष
डिस्चार्ज आवेदन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिससे आरोपी अपने खिलाफ अनावश्यक मुकदमेबाजी से बच सकता है। लेकिन इसे सही समय पर और उचित कानूनी आधारों के साथ दायर किया जाना चाहिए।