क्या एक आम आदमी गुंडा एक्ट या गैंगस्टर एक्ट में किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ अभियोग चला सकता है ?
नहीं, एक आम नागरिक स्वतंत्र रूप से उत्तर प्रदेश गुण्डा अधिनियम, 1970 (UP Goondas Act) या उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 (UP Gangsters Act) के तहत किसी व्यक्ति के खिलाफ प्रत्यक्ष अभियोजन (Prosecution) शुरू नहीं कर सकता। इन अधिनियमों के तहत कार्रवाई करने का अधिकार केवल राज्य सरकार या सक्षम प्राधिकारी (जैसे जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक) को होता है।
1. कानूनी स्थिति और न्यायिक व्याख्या:
(A) उत्तर प्रदेश गैंगस्टर अधिनियम, 1986
• इस अधिनियम के तहत अभियोजन की प्रक्रिया राज्य सरकार या अधिकृत पुलिस अधिकारी के माध्यम से ही शुरू की जाती है।
• धर्मेंद्र सिंह बनाम राज्य (2022 SCC Online All 1356) मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि गैंगस्टर अधिनियम के तहत किसी भी व्यक्ति पर कार्रवाई करने के लिए पुलिस को ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने होते हैं और यह केवल राज्य सरकार के अधीन है।
• श्रीराम वर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2008 (4) ALJ 500) मामले में हाईकोर्ट ने यह माना कि निजी व्यक्ति गैंगस्टर एक्ट के तहत सीधे मामला दर्ज करने या मुकदमा चलाने की मांग नहीं कर सकता, लेकिन वह पुलिस या प्रशासन को ज्ञापन दे सकता है और यदि वे कार्रवाई नहीं करते हैं तो संवैधानिक उपायों (जैसे रिट याचिका) का सहारा ले सकता है।
(B) उत्तर प्रदेश गुण्डा अधिनियम, 1970
• गुण्डा अधिनियम सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए एक निवारक (Preventive) कानून है, जिसमें किसी व्यक्ति को जिला मजिस्ट्रेट (DM) के आदेश से कुछ समय के लिए जिले से निष्कासित (Extern) किया जा सकता है।
• संदीप कुमार बनाम राज्य (2016 SCC Online All 4325) में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि गुण्डा एक्ट के तहत केवल जिला मजिस्ट्रेट को यह अधिकार है कि वह पुलिस रिपोर्ट या अन्य विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर किसी व्यक्ति को गुण्डा घोषित कर सके।
• राजेश यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (AIR 1993 All 200) में कहा गया कि गुण्डा अधिनियम के तहत कोई भी निजी व्यक्ति प्रत्यक्ष रूप से कार्रवाई नहीं कर सकता, लेकिन वह पुलिस को शिकायत कर सकता है और यदि पुलिस उचित कार्रवाई नहीं करती तो न्यायालय में रिट याचिका दायर कर सकता है।
2. एक आम नागरिक क्या कर सकता है?
यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ गुण्डा अधिनियम या गैंगस्टर अधिनियम के तहत कार्रवाई की आवश्यकता हो और पुलिस या प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हों, तो एक आम नागरिक निम्नलिखित कदम उठा सकता है:
1. पुलिस और जिला प्रशासन को शिकायत दें – पुलिस अधीक्षक (SP) और जिला मजिस्ट्रेट (DM) को लिखित शिकायत देकर अनुरोध करें कि आरोपी के खिलाफ गैंगस्टर या गुण्डा एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए।
2. उच्च अधिकारियों को ज्ञापन दें – यदि स्थानीय पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है, तो मुख्यमंत्री कार्यालय, गृह विभाग या पुलिस महानिरीक्षक (IG) को शिकायत भेज सकते हैं।
3. धारा 156(3) CrPC के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी दें – यदि पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है, तो मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 156(3) CrPC के तहत अर्जी दायर कर सकते हैं ताकि पुलिस को जांच करने और उचित कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया जाए।
4. हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करें – यदि पुलिस और प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, तो उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय में अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर कर सकते हैं और निर्देश मांग सकते हैं कि प्रशासन गैंगस्टर एक्ट या गुण्डा एक्ट के तहत आवश्यक कदम उठाए।
3. निष्कर्ष:
एक आम व्यक्ति स्वयं UP Gangsters Act या UP Goondas Act के तहत अभियोजन (Prosecution) शुरू नहीं कर सकता। यह शक्ति केवल पुलिस और जिला प्रशासन के पास होती है। हालाँकि, यदि प्रशासन निष्क्रिय रहता है, तो व्यक्ति शिकायत कर सकता है, न्यायालय में अर्जी दे सकता है, या हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर सकता है।