क्या शरीर के महत्वपूर्ण अंग पर ही चोट आने पर धारा 308 IPC लगाया जा सकता है ?
नहीं, यह आवश्यक नहीं है की शरीर के महत्वपूर्ण अंग पर ही चोट लगने पर ही धारा 308 आईपीसी लगाया जा सकता है । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस प्रश्न पर विजय मिश्रा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (CRIMINAL REVISION No. – 584 of 2022) मे अध्ययन किया है । कोर्ट ने कहा है की –
“धारा 308 के दोनों भागों को संयुक्त रूप से पढ़ने से यह स्पष्ट होता है कि धारा 308 में विधायी अधिदेश यह है कि जो कोई व्यक्ति किसी कार्य को ऐसे इरादे या ज्ञान के साथ और ऐसी परिस्थितियों में करता है कि यदि वह उस कार्य से मृत्यु का कारण बनता है, तो वह गैर इरादतन हत्या का दोषी होगा, लेकिन उसके द्वारा किए गए प्रयास के बावजूद वह गैर इरादतन हत्या करने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में पूरी तरह विफल रहता है, तो भी उसे धारा 308 आईपीसी के तहत अपराध करने का दोषी माना जाएगा और उसे तीन साल तक की अवधि के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जाएगा। हालांकि, यदि उसके प्रयास से किसी व्यक्ति को ऐसे कार्य से चोट पहुंचती है, तो भी वह धारा 308 आईपीसी के तहत अपराध करने का दोषी होगा और ऐसी स्थिति में अभियुक्त को सात साल तक की अवधि के लिए कारावास या जुर्माना या दोनों से उच्चतर सजा दी जाएगी।”
न्यायालय ने यह भी कहा की :-
“यदि यह मान लिया जाए कि घायल के शरीर के किसी महत्वपूर्ण अंग पर कोई चोट नहीं लगी है, तब भी प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि अभियुक्त-प्रतिवादी ने जानबूझकर या जानकारी के साथ कोई कार्य किया है और ऐसी परिस्थितियों में कि यदि उसने उस कार्य से किसी की मृत्यु की है, तो वह गैर इरादतन हत्या का दोषी होगा, तो भले ही अभियुक्त-प्रतिवादी अपने प्रयास में पूरी तरह विफल रहा हो और वह घायल के शरीर पर कोई चोट नहीं पहुंचा पाया हो, तब भी अभियुक्त-प्रतिवादी भारतीय दंड संहिता की धारा 308 के प्रथम भाग के अंतर्गत दंडनीय अपराध करने का दोषी होगा और उसे उक्त अपराध के लिए मुकदमे का सामना करना होगा।”
अतः 308 IPC का आरोप लगने के लिए यह आवश्यक नहीं है की चोट शरीर के किसी महत्वपूर्ण अंग पर लगी हो, बल्कि यह महत्वपूर्ण है की क्या अभियुक्त के कृत्य से यह साबित होता है की उसने जानबूझकर या जानकारी के साथ कोई कार्य किया है ।