क्या एफ.आई .आर के बाद पुलिस के अलावा विवेचना किसी अन्य संस्था या व्यक्ति से कराया जा सकता है ?
कुछ विशेष परिस्थितियों में एफआईआर के बाद विवेचना (जांच) पुलिस के अलावा अन्य एजेंसियों या व्यक्तियों द्वारा कराई जा सकती है। इसके प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:
- न्यायिक जांच (Judicial Inquiry):
• कुछ मामलों में, विशेष रूप से पुलिस मुठभेड़, हिरासत में मौत, या गंभीर सार्वजनिक महत्व के मामलों में, न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जांच कराई जा सकती है (धारा 176, दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC))। - विशेष एजेंसियों द्वारा जांच:
• सीबीआई (CBI): यदि उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय आदेश दे या राज्य सरकार इसकी सिफारिश करे, तो मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जा सकती है।
• एनआईए (NIA): यदि मामला आतंकवाद या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो, तो राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) इसकी जांच कर सकती है।
• ईडी (ED): यदि मामला मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) से जुड़ा हो, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) जांच कर सकता है। - विशेष जांच दल (SIT):
• कुछ मामलों में, जब पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठे, तो अदालत या सरकार विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर सकती है, जिसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी या अन्य विशेषज्ञ शामिल हो सकते हैं। - राज्य या केंद्र सरकार द्वारा गठित आयोग:
• सरकार किसी विशेष मामले में आयोग का गठन कर सकती है, जैसे कि जस्टिस नानावटी आयोग (गुजरात दंगे) या लिब्रहान आयोग (बाबरी मस्जिद मामला)। - निजी व्यक्ति द्वारा जांच:
• सामान्य आपराधिक मामलों में पुलिस विवेचना का अधिकार रखती है, लेकिन निजी जासूस (Private Investigators) द्वारा अनौपचारिक जांच की जा सकती है। हालाँकि, यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होती। - न्यायालय की निगरानी में जांच:
• यदि न्यायालय को लगे कि पुलिस जांच पक्षपाती है, तो वह विवेचना को किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंप सकता है या न्यायिक निगरानी में जांच का आदेश दे सकता है (जैसे, एससी/एसटी एक्ट से जुड़े मामले)। - उच्च न्यायालय का अधिकार – उच्च न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत विवेचना किसी सक्षम संस्थान को स्थानांतरित कर सकती है । अगर विवेचना जिला के अंतर्गत दूसरे विवेचक से विवेचना कराना हो तो धारा 156(3) द.प्र.सं के अंतर्गत संबंधित न्यायिक मैजिस्ट्रैट के समक्ष आवेदन पड़ता है, अन्यथा की स्तिथि मे उच्च न्यायालय स्थानांतरित कर सकता है। हालांकि आवेदक को उच्च न्यायालय मे यह साबित करना होगा की विवेचना मे पुलिस निष्पक्ष नहीं है ।
इस प्रकार, परिस्थितियों के आधार पर पुलिस के अलावा अन्य संस्थाएँ भी विवेचना कर सकती हैं, लेकिन यह सामान्य नहीं है और विशेष परिस्थितियों में ही ऐसा होता है।